चंद्रयान 3 के रोवर ने भेजी मून डस्ट की तस्वीर ,इसी मून डस्ट से मरते मरते बचे थे नासा के एस्ट्रोनॉट

भारत ने पिछले दिनों चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) को सफलता पूर्वक लॉन्च किया. चंद्रयान के रोवर ‘प्रज्ञान’ (Pragyan Rover) ने ‘स्लीप मोड’ में जाने से पहले चंद्रमा पर सल्फर, ऑक्सीजन, एल्युमीनियम, कैल्शियम, आयरन, क्रोमियम और टाइटेनियम जैसी चीजों का पता लगाया. ‘प्रज्ञान’ में लगे कैमरे में एक ऐसी चीज भी कैद हुई, जिसने 51 साल पहले NASA के एस्ट्रोनॉट्स की लगभग जान ले ली थी. वो चीज है ‘मून डस्ट’ (Moon Dust) यानी चांद की मिट्टी. कुछ वैज्ञानिक इसे ‘गन पाउडर’ भी कहते हैं.

51 साल पहले क्या हुआ था? अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने दिसंबर 1972 में चांद पर अपोलो 17 (Apollo 17) मिशन भेजा. इस मिशन के एक स्ट्रोनॉट हैरिसन स्मित (Harrison Schmitt) चंद्रमा की सतह का परीक्षण करने के लिए अपने स्पेसशिप से बाहर निकले. चांद की सतह पर कुछ वक्त बिताने के बाद वह अपने स्पेसशिप (Spaceship) में वापस लौट आए. हैरिसन के साथ उनके स्पेस शूट पर चिपककर ‘मून डस्ट’ (Moon Dust) भी स्पेसशिप तक आ गया. जब हैरिसन अपना स्पेस शूट निकालने लगे तो सांस के साथ ‘मून डस्ट’ भी अंदर चला गया.

किसी तरह बची एस्ट्रोनॉट्स की जान: चंद मिनट के अंदर हैरिसन स्मित की आंखें खून जैसी लाल हो गईं. नाक से पानी गिरने लगा और गला जाम हो गया. सांस लेने में भी परेशानी होने लगी. हैरिसन के साथ अपोलो 17 मिशन के अन्य सभी एस्ट्रोनॉट्स को भी यही समस्या होने लगी. थोड़ी देर बाद जब हैरिसन ने अपने स्पेससूट पर नजर डाली तो उनके होश उड़ गए. उनके जूतों का सोल बुरी तरह उखड़ गया था. स्पेसशूट भी थोड़ा डैमेज हो गया.

क्यों इतनी खतरनाक है चंद्रमा की मिट्टी?

 ‘मून डस्ट’ यानी चंद्रमा की मिट्टी इतनी खतरनाक क्यों है? वैज्ञानिकों के मुताबिक चांद की सतह पर सामान्य सी दिखने वाली मिट्टी और हमारी पृथ्वी की मिट्टी में जमीन-आसमान का अंतर है. मून डस्ट, भले ही पाउडर जैसा दिखता है, लेकिन यह सीसे जैसा नुकीला होता है. NASA की एक रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रमा की सतह से हजारों-लाखों उल्का पिंड टकराने के बाद इसका निर्माण हुआ. मून डस्ट में सिलिका और आयरन जैसे मेटल्स पाए जाते हैं. सिलिका या सिलिकेट अमूमन ऐसी जगहों पर मिलता है, जहां बड़े पैमाने पर ज्वालामुखी हैं.

source -hindi.news18.com

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